न्यायाधीश: सरकार भी दख़ल नहीं दे सकती
सभी न्यायाधीशों को मिलाकर न्यायपालिका (the judiciary) कहा जाता है। उनका काम है क़ानून की व्याख्या करना और यह पक्का करना कि मुक़दमे निष्पक्ष हों, और सरकार उनके काम में दख़ल नहीं दे सकती।
न्यायाधीशों के पास कितनी शक्ति है?
- अगर कोई दावा करता है कि सरकार ने ग़ैरक़ानूनी काम किया है, और न्यायाधीश सहमत हों, तो सरकार को या तो अपनी नीति बदलनी होगी या संसद से क़ानून बदलने को कहना होगा।
- अगर न्यायाधीश तय करते हैं कि किसी सार्वजनिक संस्था ने किसी के क़ानूनी अधिकारों का सम्मान नहीं किया है, तो वे उसे अपना व्यवहार बदलने, या मुआवज़ा देने, या दोनों का आदेश दे सकते हैं।
- न्यायाधीश लोगों या संगठनों के बीच के विवाद भी सुलझाते हैं, जैसे अनुबंधों, संपत्ति, रोज़गार के अधिकारों, या किसी दुर्घटना के बाद की स्थिति को लेकर।
एक काम ब्रिटिश न्यायाधीश कभी नहीं करते: लकड़ी का हथौड़ा (gavel) ठोकना। यह हथौड़ा अमेरिकी टीवी ड्रामों में हमेशा दिखता है, लेकिन इंग्लैंड और वेल्स की अदालतों में यह होता ही नहीं; तथ्यों की जाँच करने वाली चैरिटी संस्था फ़ुल फ़ैक्ट (Full Fact) ने यह ग़लतफ़हमी दूर करने के लिए 2014 में एक लेख भी लिखा था। ब्रिटिश अदालतों की मशहूर पहचान है विग और चोगे।
क्विज़
Which of the following statements is correct?
प्रश्न हिंदी में
इनमें से कौन-सा कथन सही है?A: अगर न्यायाधीश फ़ैसला दें कि सरकार का कोई काम ग़ैरक़ानूनी है, तो मंत्रियों को अपनी नीति बदलनी होगी या संसद से क़ानून में संशोधन करवाना होगा।
B: सरकार के मंत्री जब भी असहमत हों, अदालत का फ़ैसला पलट सकते हैं।
न्यायाधीश स्वतंत्र हैं: सरकार उनके काम में दख़ल नहीं दे सकती। अगर न्यायाधीश पाते हैं कि सरकार ने ग़ैरक़ानूनी काम किया है, तो सरकार सिर्फ़ अपनी नीति बदल सकती है या संसद से क़ानून बदलने को कह सकती है।