1948–1970 का दशक
युद्ध के बाद का प्रवासन: मिलकर ब्रिटेन को फिर से बनाना
दूसरे विश्व युद्ध के बाद, जब ब्रिटिश साम्राज्य धीरे-धीरे बिखर रहा था, तब भी ब्रिटेन देश के भीतर के काम के लिए विदेश से मदद ढूँढ रहा था। युद्ध के बाद देश को फिर से खड़ा करना बहुत बड़ा काम था, और ब्रिटेन में मज़दूरों की भारी कमी थी। सरकार ने पहले कदम के रूप में आयरलैंड और यूरोप के बाक़ी हिस्सों से मज़दूरों को मदद के लिए बुलाया। 1948 में वेस्ट इंडीज़ (कैरिबियन) के लोगों को भी काम करने के लिए बुलाया गया।
1950 के दशक में भी मज़दूर पूरे नहीं थे, इसलिए देश आर्थिक कारणों से लोगों को आने के लिए प्रोत्साहित करता रहा। कई उद्योगों ने विदेश में कर्मचारियों की तलाश की। उदाहरण के लिए:
- बस ड्राइवर ढूँढने के लिए वेस्ट इंडीज़ में भर्ती केंद्र खोले गए।
- मिडलैंड्स (Midlands) और उत्तरी इंग्लैंड की कपड़ा और इंजीनियरिंग कंपनियों ने मज़दूर ढूँढने के लिए भारत और पाकिस्तान में लोग भेजे।
लगभग 25 वर्षों में वेस्ट इंडीज़, भारत और पाकिस्तान से, और बाद में बांग्लादेश से भी, बहुत से लोग काम करने और ब्रिटेन में बसने आए।
लेकिन 1960 के दशक के अंत में सरकार ने आप्रवासन (इमिग्रेशन) को सीमित करने के लिए नए क़ानून बनाए। तब से ब्रिटेन में रहने आने वालों का जन्म या पारिवारिक पृष्ठभूमि के ज़रिए देश से गहरा संबंध होना ज़रूरी हो गया, और संख्या घट गई। फिर भी 1970 के दशक की शुरुआत में ब्रिटेन ने युगांडा (Uganda) से निकाले गए भारतीय मूल के 28,000 लोगों को शरण दी। उन्हें 1972 में निकाला गया था, जब युगांडा के तानाशाह ईदी अमीन (Idi Amin) ने वहाँ रहने वाले सभी एशियाई लोगों को 90 दिनों के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया। उनमें से कई के पास ब्रिटिश पासपोर्ट थे, और बहुत से लोग लेस्टर (Leicester) जैसे शहरों में बस गए और शून्य से अपने कारोबार खड़े किए।
क्विज़
Is the statement below TRUE or FALSE? In the 1950s, recruitment centres in the West Indies looked for people to work as bus drivers in Britain.
प्रश्न हिंदी में
नीचे दिया गया कथन सही (TRUE) है या ग़लत (FALSE)? कथन: 1950 के दशक में वेस्ट इंडीज़ के भर्ती केंद्र ऐसे लोगों की तलाश करते थे जो ब्रिटेन में बस ड्राइवर का काम करें।सही। इस प्रश्न के दूसरे रूप से सावधान रहें: भारत और पाकिस्तान में मज़दूर ढूँढने बस कंपनियाँ नहीं, बल्कि कपड़ा और इंजीनियरिंग कंपनियाँ गई थीं।